उत्तर कर्नाटक का विजयपुरा (पहले बीजापुर) ज़िला राज्य के प्रमुख अंगूर उत्पादक ज़िलों में से है। महाराष्ट्र के सांगली और तासगांव के साथ मिलकर यह वह क्षेत्र बनाता है जहाँ भारत की ज़्यादातर किशमिश बनती है।
यहाँ किशमिश क्यों बनती है
तुड़ाई के मौसम (देर सर्दी और वसंत) में इस क्षेत्र का सूखा, धूप वाला मौसम अंगूर सुखाने के लिए अनुकूल है। ज़्यादातर बागों में थॉम्पसन सीडलेस परिवार के बीज-रहित हरे अंगूर उगते हैं, जिनसे भारतीय बाज़ार में दिखने वाली लंबी और गोल हरी, पीली और सुनहरी किशमिश बनती है।
किशमिश कैसे सुखाई जाती है
तुड़ाई के बाद गुच्छों को आम तौर पर एक घोल में डुबोया जाता है जिससे वे जल्दी सूखते हैं, फिर छायादार शेड में रैक पर फैलाया जाता है। छाँव में सुखाने से किशमिश हरी या सुनहरी रहती है; धूप में सुखाने से भूरी हो जाती है। मौसम के अनुसार सुखाने में लगभग दो हफ़्ते लगते हैं। फिर किशमिश साफ़ और छाँटी जाती है और अक्सर बिकने तक कोल्ड स्टोरेज में रखी जाती है।
फ़सल का मौसम
नई किशमिश आम तौर पर मार्च से मई के आसपास बाज़ार में आती है। कोल्ड स्टोरेज का स्टॉक बाक़ी साल बिकता है, इसलिए हर किस्म और ग्रेड की उपलब्धता मौसम के साथ बदलती है।
विजयपुरा में VISAVA
VISAVA GROUP की किशमिश फैक्टरी 18/2B व 18/5, सोलापुर रोड, NH13, तिडगुंदी 586119, विजयपुरा ज़िले में है। हम क्षेत्र से किशमिश खरीदकर छाँटते, ग्रेड करते, साफ़ करते और पूरे भारत के थोक खरीदारों और विदेशी आयातकों के लिए पैक करते हैं। और पढ़ें: किशमिश सप्लायर, विजयपुरा।
- विकिपीडिया — किशमिश
- The Hindu — raisin processing in Vijayapura (English)
- खाद्य सुरक्षा नियमों के लिए भारत में FSSAI और निर्यात के लिए गंतव्य देश के आयात नियम देखें।